Tuesday, 27 May 2014

निम्न विचार न होते

जो    ये     ठेकेदार    न  होते
मजहब  युँ   बिमार   न  होते।

न  होती  साम्प्रदायिक बातें,
लोग  कभी  खूंखार  न  होते।

प्रेम  भाव  आपस  में  रहता,
हद   पे   खींचे  तार  न  होते।

ना  खोते पाकिस्तान  कभी,
फिर  ये झगड़े, यार  न  होते।

ना जलता हिन्दुस्तान कभी
काफिर जो  सरकार न होते।

क्या मस्जिद, मंदिर होते! गर
काजी-पण्डित, यार न होते।

सर्वत्र    व्याप्त   सद्भावना   ही
होती,  निम्न  विचार  न होते।

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