जो ये ठेकेदार न होते
मजहब युँ बिमार न होते।
न होती साम्प्रदायिक बातें,
लोग कभी खूंखार न होते।
प्रेम भाव आपस में रहता,
हद पे खींचे तार न होते।
ना खोते पाकिस्तान कभी,
फिर ये झगड़े, यार न होते।
ना जलता हिन्दुस्तान कभी
काफिर जो सरकार न होते।
क्या मस्जिद, मंदिर होते! गर
काजी-पण्डित, यार न होते।
सर्वत्र व्याप्त सद्भावना ही
होती, निम्न विचार न होते।
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