हरियाली फिर से आएगी,
धरती ये चमन बन जाएगी।
बीते तेज़ तपन के दिन भी,
सर्व सुलभ होगा जीवन भी,
रज-रज के बरसेंगे घन भी।
पुरवैया ठण्डक लाएगी,
हरियाली....................
अब बान्ध कमर निकला हलधर,
नव ऋतु के अभिनन्दन खातिर,
फिर नयी जोति जगा निज भीतर।
मेहनत ये रंग लाएगी,
हरियाली....................
नीरद से युँ 'नीरद' जो मिला,
शुरू हुआ एक् नया सिलसिला,
नव ऋतु का संकेत मिला।
फसलें सब खेत सजाएगी,
हरियाली....................
पसरेगी दूब दुशाला बन,
झरनों की भी होगी सरगम,
महकेगा क्षिति का फिर यौवन।
घर-घर खुशहाली आएगी,
हरियाली......................
दादुर, मोर, कोकिला बोले,
पपिहा बन आवारा डोले,
जन मानस खाता हिचकोले।
हर आस पूर्ण हो जाएगी,
हरियाली....................
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