कविता, गजल एवं अन्य साहित्यिक रचनाएँ । नवसृजन
खिल गया जो गुल कभी वो लब्ध-ए-मंजिल हुआ। तोड़ के नाता कली से गर्द में शामिल हुआ। चार दिन की जिन्दगी है बात ये समझें अगर, क्या किया आकर यहाँ पर जो फकत बोझिल हुआ।
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