स्नेहिल कलरव उषा मनोहर।
आलोकित है सकल चराचर।।
गगन लालिमा अतिशय मोहक।
फुटकल घन आलम्ब धरा तक।।
धूप छरहरी पड़ी धरातल।
चमकी शय सब सदॄश मखमल।।
शान्त सरोवर जल सम दर्पन।
छटा विहंगम सोहन सोहन।।
पुलकित पल्लव प्रत्युष पाकर।
पात-पात खिल गए यहाँ पर।।
गूंज रहा संगीत सुहाना।
मंदिर मस्जिद चारों खाना।।
हरी-हरी हर ओर रमा है।
कैसा सूंदर दृश्य बना है।।
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