डील ये सूखे हुये देते दुहाई आज देखो,
बाल-बच्चे मांगते हैं भीख साईं आज देखो।
दर्द ये कैसा जहाँ में व्यापता ही जा रहा है,
मर्म को छूती नमाज़ें दे सुनाई आज देखो।
बाल क्यों उन्मुक्तता से दूर होते जा रहे हैं?
कारखानों में करे बोझा ढुलाई आज देखो।
किस्मतों का खेल है या भूल कोई है हमारी,
छोड़ देते हैं बिचारे ये पढ़ाई आज देखो।
घात खाए जा रहे, नाचीज़ होके जी रहे हैं,
पीर ये जाने नहीं लोगो-लुगाई आज देखो।
भूख में तो भोज ना औ मौत पे पाये उठाते,
कोण में बैठे रहे रो, तात-ताई आज देखो।
बेहयाई देख लेना राह में मौका मिले तो,
अस्मतें है लूटते बैमान भाई आज देखो।
लूटते इंसान को, इंसान तो हैवां बने है,
या खुदा ! ये भूल बैठे हैं खुदाई आज देखो।
No comments:
Post a Comment