Monday, 23 June 2014

आबाद हो हरदम

मेरा ये हिन्द मेरी जान जिन्दाबाद हो हरदम,
यहाँ के हर गली हर शह्र में आल्हाद हो हरदम।

तमन्ना है क़लम सर हो ज़मीने-पाक़ की ख़ातिर,
जुबां पर नाम हो भारत यही फरियाद हो हरदम।

मेरी है चाह बस इतनी झुके सज़दे में सर मेरा,
नज़र में अक्स हो तेरा कि तू ही याद हो हरदम।

मुझे बचपन जवानी और ये सबकुछ दिया तूने,
रहे अव्वल तेरा ही नाम बाक़ी बाद हो हरदम।

सदा आलम मुहब्बत का यहाँ क़ायम रहे यारों,
उड़े ना रश्क का धूआँ हँसी-उन्माद हो हरदम।

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