कविता, गजल एवं अन्य साहित्यिक रचनाएँ । नवसृजन
शेष बचे अवशेष से, मानव लीजै ज्ञान। माया काया कोट का, ये ही अन्त निदान।। ये ही अन्त निदान, उठेगा इक दिन डेरा। 'नीरद' ले गुरु ज्ञान , मिटे चौरासी फेरा।। भटका भवजल बीच, बहुत से दिन खरचे। जीते-जी भज राम, दिवस थोड़े शेष बचे।।
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