Wednesday, 17 September 2014

मुक्तक 8


सितारा वहाँ झिलमिला हँस रहा है,
यहाँ तो शिला पे शिला रख खड़ा है।
यही फासला है फ़लक औ जमीं में,
तभी तो फ़लक के सभी आशना है।

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