कविता, गजल एवं अन्य साहित्यिक रचनाएँ । नवसृजन
सितारा वहाँ झिलमिला हँस रहा है, यहाँ तो शिला पे शिला रख खड़ा है। यही फासला है फ़लक औ जमीं में, तभी तो फ़लक के सभी आशना है।
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